8 मार्च 20266 मिनट पढ़ें
पश्चाताप पर सांस्कृतिक दृष्टिकोण
दुनिया भर की विभिन्न संस्कृतियां पश्चाताप को कैसे समझती हैं, व्यक्त करती हैं और उससे निपटती हैं यह मानव मनोविज्ञान के बारे में आकर्षक अंतर्दृष्टि प्रकट करता है।
मुख्य बात
"सार्वभौमिक पश्चाताप विविध सांस्कृतिक लेंसों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है, व्यक्तिगत जिम्मेदारी को सामुदायिक सद्भाव के साथ जोड़ता है।"
पश्चिमी व्यक्तिवाद: पसंद का बोझ
पश्चिमी संस्कृतियों में, पश्चाताप अक्सर व्यक्तिगत पसंद और व्यक्तिगत जिम्मेदारी से जुड़ा होता है।
पूर्वी सामूहिकता: सद्भाव और स्वीकृति
- जापानी "शिकाता गा नाई": "इसे ठीक नहीं किया जा सकता।" स्वीकृति को प्रोत्साहित करता है।
- बौद्ध दृष्टिकोण: अतीत की घटनाओं से लगाव दुख का कारण बनता है।
इस्लामी दृष्टिकोण
इस्लाम "तौबा" (पश्चाताप) की अवधारणा के माध्यम से एक संरचित दृष्टिकोण प्रदान करता है: गलती को स्वीकार करना और रोकना, वास्तविक पश्चाताप महसूस करना, क्षमा मांगना और न दोहराने का प्रतिबद्ध होना।
अफ्रीकी उबुंटू दर्शन
"मैं हूं क्योंकि हम हैं।" उपचार में सामुदायिक प्रक्रियाएं शामिल हैं: स्वीकारोक्ति, सुलह और सामाजिक सद्भाव की बहाली।
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